स्विट्जरलैंड ने अपने वैश्विक वित्तीय केंद्र होने की हैसियत को दोबारा हासिल करने के लिए अपने बैंकों की जानकारियों को खुफिया रखने की प्रतिबद्धता छोड़ दी है।
स्विट्जरलैंड ने अपने वैश्विक वित्तीय केंद्र होने की हैसियत को दोबारा हासिल करने के लिए अपने बैंकों की जानकारियों को खुफिया रखने की प्रतिबद्धता छोड़ दी है। खासतौर पर देखा गया है कि स्विस बैंकों के भारतीय ग्राहकों की जानकारियों को साझा करने की प्रक्रिया में तेजी आई है। पिछले एक हफ्ते में करीब ऐसे एक दर्जन मामले सामने आए हैं।
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स्विट्जरलैंड के प्रशासन ने करीब मार्च से ही कम से कम 25 नोटिस स्विस बैंकों के भारतीय ग्राहकों को जारी किए हैं। इन नोटिसों में स्विस प्रशासन ने उन्हें भारत के साथ उनका ब्योरा साझा करने के खिलाफ अपील करने का आखिरी मौका देने की बात कही गई है।
स्विट्जरलैंड सरकार के फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (एफटीए) की ओर से जारी नोटिस के विश्लेषण के अनुसार विदेशी ग्राहकों की जानकारी साझा करने का अर्थ है कि पिछले कुछ हफ्तों में भारत से जुड़े मामलों में जांच की रफ्तार बढ़ी है।
कम से कम 11 ऐसे नोटिस भारतीय नागरिकों को 21 मई तक जारी किए जा चुके हैं। हालांकि स्विस सरकार ने इन जानकारियों को सार्वजनिक करते हुए भी नामों को पूरा न लिखकर केवल उनके इनीशियल बताए गए हैं। इसके अलावा उनकी नागरिकता और जन्मतिथि का भी ब्योरा दिया गया है। जिन दो भारतीयों के पूरे नाम दिए गए हैं, वह हैं- कृष्ण भगवान रामचंद (जन्म-मई 1949) और कल्पेश हर्षद किनारीवाला (जन्म तिथि सितंबर, 1972) हैं।
भारतीय नागरिकों के इनीशियल नामों में श्रीमती एएसबीके (जन्म-24 नवंबर, 1944), एबीकेआइ (9 जुलाई,1944), श्रीमती पीएएस (जन्म-2 नवंबर, 1983), श्रीमती आरएएस (22 नवंबर, 1973), एपीएस (जन्म-27 नवंबर, 1944), श्रीमती एडीएस (जन्म-14 अगस्त, 1949), एमएलए (जन्म-20 मई, 1935), एनएमए (जन्म-21 फरवरी, 1968) और एमएमए (27 जून, 1973) के नाम शामिल हैं।
इन नोटिसों में व्यक्तिगत या आधिकारिक प्रतिनिधियों से अपील दायर करने को कहा गया है। अगर वह ऐसा करते हैं तो उन्हें 30 दिनों के अंदर ही करना होगा। अपने मामले के समर्थन में उन्हें दस्तावेजी सुबूत भी देने होंगे। ताकि भारत को इन मामलों में प्रशासनिक मदद दी जा सकती है। इसका अर्थ है अपने बैंकिंग और वित्तीय ब्योरों को व्यापक रूप से साझा किया जा सकेगा।
इस महीने की शुरुआत में 7 मई को ऐसा ही एक नोटिस एक अन्य भारतीय नागरिक रतन सिंह चौधरी को दस दिन में ही अपील करने को कहा गया है। अप्रैल में भी श्रीमती जेएनवी समेत कुलदीप सिंह ढींगरा और अनिल भारद्वाज को भी नोटिस दिया गया है। इनमें से कई नाम एचएसबीसी की लीक हुई सूची में थे। भारत सरकार काले धन के मामले में इन लोगों की जांच कर रही है।
मार्च में भी स्विट्जरलैंड ने मुंबई की जियोडेसिक लिमिटेड और उसके तीन निदेशकों (प्रशांत शरद मुलेकर, पंकज कुमार ओंकार श्रीवास्तव और किरण कुलकर्णी), चेन्नई के आदि इंटरप्राइज के खिलाफ मनी लांड्रिंग के मामले में भारतीय प्रशासन जांच कर रहा है।
Source :- www.jagran.com
