शीला दीक्षित को दिल्ली कांग्रेस का प्रदेश अध्यक्ष बनाने के पीछे हैं ये 10 कारण

लगातार15 साल तक दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित के हाथ में फिर से प्रदेश कांग्रेस की कमान आ गई है।

लगातार15 साल तक दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री रहीं शीला दीक्षित के हाथ में फिर से प्रदेश कांग्रेस की कमान आ गई है। अगले कुछ घंटों में इसका आधिकारिक एलान भी हो जाएगा। बताया जा रहा है कि शीला दीक्षित में एक साथ कई खूबियां हैं। वे पूर्वांचल की हैं और पंजाबी भी हैं, इसके साथ महिला और ब्राह्मण तो हैं हीं, इसलिए कांग्रेस आलाकमान ने उनके नाम पर सहमत बनाई है। माना जा रहा है कि इसका बड़ा लाभ 2019 लोकसभा चुनाव  और फिर 2020 में होने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी मिल सकता है। आइए जानते हैं कि दिल्ली कांग्रेस के पास कई युवा और तेजतर्रार चेहरा होते हुए भी मार्च महीने में 80 साल की होने जा रहीं शीला दीक्षित को अध्यक्ष क्यों चुना गया ? 

  • दिल्ली में कांग्रेस को एक ऐसे हाथ की जरूरत थी, जो पार्टी को तीसरे स्थान से ऊपर ले जा सके। शीला दीक्षित के पास 15 साल तक दिल्ली में सफल सरकार चलाने का शानदार अनुभव है। 
  • कांग्रेस को दिल्ली के लिए शीला दीक्षित से बेहतर फिलहाल नहीं नजर आया। जो नाम आए भी शीला का कद और अनुभव सब पर भारी पड़ता दिख रहा है।
  • जिस तरह पार्टी में अंदरूनी कलह है, उसे बहुत हद तक पाटने का काम शीला दीक्षित कर सकती हैं। 
  • 2019 में कांग्रेस दिल्ली में अपने लिए संभावनाएं तलाश रही है। ऐसे में अनुभवी शीला की आगे सबका छोटा पड़ गया।
  • शीला के बारे में कहा जा रहा है कि प्रदेश की 15 साल तसीएम रहने के साथ-साथ उनकी यह खूबी भी है कि वह सभी को साथ लेकर चल सकती हैं।
  • कांग्रेस अध्यक्ष बनाने के पीछे यह भी तर्क दिया जा रहा है कि पिछले 15 सालों तक सीएम रहने के चलते वह जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के साथ काफी गहराई से जुड़ी हैं।
  • शीला दीक्षित 15 साल तक सीएम रहीं, इस दौरान कई आरोप लगे, लेकिन साबित कोई नहीं हुआ। ऐसे में यह पहलू भी उनके पक्ष में रहा।
  • शीला दीक्षित पैदायशी पंजाबी हैं, लेकिन उनकी शादी ब्राह्मण परिवार में हुई थी। ऐसे में उनकी स्वीकार्यता पंजाबी और ब्राह्मण समुदाय दोनों में है। 
  • शीला दीक्षित के रिश्ते हमेशा से पार्टी आलाकमान से अच्छे रहे हैं, यही वजह है कि कांग्रेस ने उन्हें इस पद के लिए चुना।
  • शीला राहुल और सोनिया गांधी की पसंदीदा भी रही हैं। यही वजह है कि दिल्ली विधानसभा का चुनाव हारने के बाद उन्हें केरल का राज्यपाल बनाया गया।

Sources :- jagran.com

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