Monday, February 16, 2026

नई शिक्षा नीति में आठवीं क्लास तक अनिवार्य होगी हिंदी, फिर छिड़ सकता है भाषाई विवाद

आठवीं क्लास तक हिंदी को अनिवार्य बनाते हुए तीन भाषाई फॉर्मूला, पूरे देश में विज्ञान और गणित का एक समान सिलेबस

Hindi

आठवीं क्लास तक हिंदी को अनिवार्य बनाते हुए तीन भाषाई फॉर्मूला, पूरे देश में विज्ञान और गणित का एक समान सिलेबस, जनजातीय समूहों के लिए अलग देवनागरी उपभाषा और हुनर आधारित शिक्षा- यह कुछ मुख्य सिफारिशें हैं जो के. कस्तूरीरंगन की अगुवाई वाली नौ सदस्यीय समिति ने रिपोर्ट में सौंपी है।सूत्रों के मुताबिक इस कमेटी ने 31 दिसंबर 2018 को अपना कार्यकाल समाप्त होने से पहले पिछले महीने ही मानव संसाधन विकास मंत्रालय को सौंप दी है। मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि रिपोर्ट तैयार है और कमेटी के सदस्यों ने मुझसे मिलने का समय मांगा था। संसद सत्र के बाद रिपोर्ट मुझे मिलेगी। सूत्रों के मुताबिक सरकार इस पॉलिसी को सार्वजनिक कर इसपर सुझाव मांग सकती है।

बताया जा रहा है कि सामाजिक विज्ञान के अंतर्गत आनेवाले विषयों में स्थानीय चीजें होंगी जबकि सभी बोर्ड में विज्ञान और गणित का एक ही सिलेबस होगा, भले ही विज्ञान और गणित किसी भी भाषा में पढ़ाया जाए। सूत्रों के मुताबिक नई शिक्षा नीति में पांचवीं क्लास तक अवधी, भोजपुरी और मैथली जैसी स्थानीय भाषाओं का भी सिलेबस बनाने को कहा गया है। साथ ही उन जनजातीय इलाकों में जहां लेखन की कोई लिपि नहीं है या मिशनरियों के प्रभाव के कारण रोमन लिपि का उपयोग होता है वहां देवनागरी लिपि का विस्तार करने की बात कही गई है। यह शिक्षण नीति एक ऐसी शिक्षा व्यवस्था की बात करती है जिसके केंद्र में भारत हो।

नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तीन भाषाई नीति के साथ-साथ आठवीं क्लास तक हिंदी को अनिवार्य करने की वकालत करता है। वर्तमान में गैर हिंदी भाषी राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, गोवा, पश्चिम बंगाल और असम में में हिंदी अनिवार्य नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक अगस्त 2018 के बाद प्रधानमंत्री कार्यालय से मिले सुझावों और मैराथन चर्चा के बाद नई शिक्षा नीति का ड्राफ्ट तैयार किया गया है। इसके अलावा पैनल ने सात राज्यों के प्रतिनिधि और मानव संसाधन मंत्री प्रकश जावड़ेकर से भी चर्चा की है। सूत्रों की मानें तो 20 दिसंबर को दिल्ली में आरएसएस संस्थानों के शिक्षा समूह में भी इसको लेकर चर्चा हुई थी। अक्टूबर में आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी नई शिक्षा नीति में हो रही देरी पर चिंता जाहिर की थी। 2015 के आरएसएस के अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा में भी प्राथमिक शिक्षा स्थानीय भाषा में कराने को लेकर प्रस्ताव पास हुआ था।

पिछली शिक्षा नीति 1986 में लाई गई थी जिसमें 1992 में बदलाव किए गए थे। शिक्षा नीति के आधार पर ही 2005 में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम ढांचा तैयार किया गया था जिसे दस साल बाद फिर से जारी होना था मगर एनडीए सरकार ने नई शिक्षा नीति लाने का फैसला किया।

Sources :- amarujala.com

Hot this week

धानी से सोनौली तक सस्ती बस सेवा शुरू ग्रामीणों को बड़ी सौगात

महराजगंज। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा से जोड़ने...

कोठीभार में दर्दनाक सड़क हादसा: ट्रक–बाइक टक्कर में पिता-पुत्र दोनों की मौत

महराजगंज :- जिले के थाना कोठीभार क्षेत्र अंतर्गत हरपुर...

मनरेगा कार्यों का डीएम ने किया औचक निरीक्षण, जॉब कार्ड में गड़बड़ी पर जताई नाराजगी

महराजगंज - जिलाधिकारी संतोष कुमार शर्मा ने शुक्रवार को...

Topics

धानी से सोनौली तक सस्ती बस सेवा शुरू ग्रामीणों को बड़ी सौगात

महराजगंज। ग्रामीण क्षेत्रों को बेहतर परिवहन सुविधा से जोड़ने...

कोठीभार में दर्दनाक सड़क हादसा: ट्रक–बाइक टक्कर में पिता-पुत्र दोनों की मौत

महराजगंज :- जिले के थाना कोठीभार क्षेत्र अंतर्गत हरपुर...

नेपाल जा रही बस दुर्घटनाग्रस्त, चालक की लापरवाही से पांच घायल

महाराजगंज जनपद के श्यामदेउरवा थाना क्षेत्र अंतर्गत परतावल चौराहे...

घुघली में पम्पिंग सेट चोरी का पर्दाफाश, तीन चोर धराए

महराजगंज। घुघली थाना क्षेत्र के ग्राम पतालकुई में किसानों...

प्रतियोगिता से लेकर सांस्कृतिक कार्यक्रम तक होंगे शामिल

महराजगंज। नसरुल्लाह इंटरमीडिएट कॉलेज, आर.एन. आदर्श गर्ल्स कॉलेज एवं...
spot_img

Related Articles

Popular Categories

spot_imgspot_img

Discover more from Headlines | Updates | Analysis

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading