कैबिनेट की बैठक में बौद्ध तीर्थ स्थल कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को मंजूरी दे गई है

कुशीनगर : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में बौद्ध तीर्थ स्थल कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा को मंजूरी दे गई है। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं और इससे जुड़ी उम्मीदें परवान चढ़ती दिख रही हैं। जानकारों का मानना है कि एक बार अंतरराष्ट्रीय उड़ानें शुरू हो गईं तो कुशीनगर को पर्यटन का हब बनते देर नहीं लगेगी। इससे बुद्ध सर्किट के देशों को लेकर पर्यटन और रोजगार की सम्भावनाओं को पंख लग जाएंगे। कैबिनेट के एलान से कुशीनगर में जश्न का माहौल है।
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कुशीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा से पहले चरण में म्यांमार, बैकॉक, सिंगापुर, भैरहवा, काठमांडू के लिए उड़ानें शुरू करने की योजना है। अगले चरण में श्रीलंका, कोरिया, भूटान, जापान और बुद्ध सर्किट के अन्य देशों के लिए भी उड़ानें शुरू होंगी। इन देशों से बड़ी तादाद में बौद्ध पर्यटक भारत आते हैं। हवाई अड्डा पूर्वी उत्तर प्रदेश में बौद्ध पर्यटन संभावनाओं को बढ़ावा देगा। यह क्षेत्र पूरी दुनिया से तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को आकर्षित करता है।
लखनऊ में 2018 में आयोजित इन्वेस्टर समिट में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कुशीनगर हवाई पट्टी को अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने की घोषणा की थी। इसके बाद तीन सितंबर 2018 को कारगो की छह सदस्सीय टीम ने हवाई पट्टी का निरीक्षण भी किया था। छह सीटर विमान से आई इस टीम ने एअरपोर्ट के व्यवसायिक उपयोग की संभावनाओं को टटोला था। तैयारियों से संतुष्ट दिखे कारगो के जनरल सेक्रेटरी ने कुशीनगर एअरपोर्ट को हवाई यात्रा के अतिरिक्त व्यवसायिक हब बनाने की बात भी कही थी। उनका कहना था कि एअरपोर्ट के बन जाने से नेपाल के अलावा भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को परिवहन सुविधा का लाभ मिलेगा।






