Sunday, October 2, 2022
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Manohar Parrikar Dies: लंबी बीमारी के बाद गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का निधन

Manohar Parrikar Dies: लंबी बीमारी के बाद गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर का आज रविवार की शाम निधन हो गया। मनोहर पर्रिकर 63 साल के थे। पर्रिकर अग्नाशय की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। पर्रिकर के निधन से पूरा देश शोकाकुल है। बीमारी का पता चलने के ठीक एक साल बाद मनोहर पर्रिकर का पणजी आवास पर निधन हो गया। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने ट्वीट कर कहा, “गोवा के मुख्यमंत्री श्री मनोहर पर्रिकर के निधन पर अत्यंत दुख हुआ है। घंटों पहले, पर्रिकर के कार्यालय ने ट्वीट किया था कि उनकी स्थिति “अत्यंत गंभीर” थी और “डॉक्टर अपनी पूरी कोशिश कर रहे हैं”। पिछले एक साल में गोवा, मुंबई, न्यूयॉर्क और नई दिल्ली के अस्पतालों में उनका इलाज चलता रहा था।

आज होगा मनोहर पर्रिकर का अंतिम संस्कार

मनोहर पर्रिकर का पार्थिव शरीर सोमवार सुबह 9:30 से 10:30 बजे तक पणजी में भाजपा हेडक्वार्टर पर रखा जाएगा। 10:30 बजे उनका पार्थिव शरीर कला अकादमी ले जाया जाएगा। सुबह 11 से शाम 4 बजे तक आम जनता मनोहर पर्रिकर को श्रद्धांजलि दे सकेगी। शाम 5 बजे मनोहर पर्रिकर का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

भाजपा के सभी आधिकारिक कार्यक्रम रद्द

पूर्व रक्षा मंत्री और गोवा के सीएम मनोहर पर्रिकर के निधन के बाद आज सोमवार को CEC सहित भाजपा के सभी आधिकारिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए हैं।

पीएम मोदी ने जताया दुख

Shri Manohar Parrikar was the builder of modern Goa. Thanks to his affable personality and accessible nature, he remained the preferred leader of the state for years. His pro-people policies ensured Goa scales remarkable heights of progress.

मनोहर पर्रिकर के निधन पर शोक जताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कहा, ‘श्री मनोहर पर्रिकर आधुनिक गोवा के निर्माता थे। अपने मिलनसार व्यक्तित्व और सुलभ स्वभाव की बदौलत वर्षों तक राज्य के पसंदीदा नेता बने रहे। उनकी जन-समर्थक नीतियों ने गोवा को प्रगति की उल्लेखनीय ऊंचाइयों तक पहुंचाया।’

लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा- पर्रिकर एक योद्धा थे

पर्रिकर के निधन पर भाजपा के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने कहा कि पर्रिकर लंबे समय से अपनी बीमारी से लड़ रहे थे। मुझे इसी साल जनवरी में उनसे मिलने का मौका मिला था। बीमारी के बावजूद वह ऑफिस का काम करते रहे और लोगों से लगातार मुलाकातें भी करते रहे। वह सही मायने में एक योद्धा थे, जिनके योगदान से भाजपा ने गोवा में पहली बार सरकाई बनाई। उनके निधन पर पर्रिकर के परिवार के प्रति में अपनी सांत्वना व्यक्त करता हूं। 

राहुल ने कहा- गोवा के चहेते थे पर्रिकर

कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी मनोहर पर्रिकर के निधन पर शोक जताते हुए उन्हें ‘गोवा का चहेता बताया।’उन्होंने कहा कि पार्टीवार राजनीति से ऊपर उठकर सभी लोग पर्रिकर का मान-सम्मान करते थे और बड़े साहस से वह एक साल तक बीमारी से लड़ते रहे। राहुल ने ट्वीट किया है, ‘‘गोवा के मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर के निधन की सूचना से मैं बहुत आहत हूं। वह गोवा के सबसे लोकप्रिय बेटों में से एक थे। दुख की इस घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिजनों के साथ हैं।’’

अग्नाशय की गंभीर बीमारी से पीड़ित थे पर्रिकर

मनोहर पर्रिकर को फरवरी 2018 में उनके अग्नाशय की गंभीर बीमारी के बारे में पता चला था। मनोहर पर्रिकर एक ईमानदार और सादगी भरा जीवन जीने वाले नेता के तौर पर हमेशा याद किए जाएंगे। आईआईटी बॉम्बे से ग्रेजुएट पर्रिकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सक्रिय प्रचारक थे। वह तीन बार गोवा के मुख्यमंत्री रहे। अग्नाशय की गंभीर बीमारी से पीड़ित होने के बावजूद वे कभी अपनी जिम्मेदारियों से पीछे नहीं हटे। उन्होंने कहा था कि मानव मस्तिक किसी भी बिमारी पर जीत पा सकता है।

अमेरिका से सितंबर में इलाज कराकर भारत लौटे थे पर्रिकर

पर्रिकर सितंबर में अमेरिका से इलाज कराकर भारत लौटे थे। वहां एक हफ्ते तक उनका इलाज चला था। इससे पहले एक बार और इलाज के लिए तीन महीने तक उन्हें अमेरिका में रहना पड़ा था। अमेरिका से लौटने के बाद पिछले साल अक्टूबर में एक बार फिर उनकी तबीयत खराब हुई थी। तब उन्हें दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। एक महीने एम्स में भर्ती रहने के बाद उन्हें एयर एंबुलेंस के जरिए गोवा ले जाया गया था।

वीके सिंह ने कहा- भारत और गोवा ने सपूत खोया

Sad demise of @manoharparrikar ji leaves a void in our lives. He was a leader who came up with pragmatic solutions to the most complex problems-Goa & India have lost a stalwart today. The nation & I mourn your loss, & will miss you. Rest In Peace my dear friend. ऊँ शान्ति शान्ति।

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मनोहर पर्रिकर के निधन पर केन्द्रीय मंत्री वीके सिंह ने ट्वीट संवेदना जताई और कहा कि उनकी कमी हमेशा खलेगी। उनकी जगह कोई नहीं ले सकता। वीके सिंह ने कहा कि वे एक ऐसे नेता थे जो कठिन समस्याओं का प्रैक्टिकल समाधान लाते थे। गोवा और भारत ने आज एक महान सपूत को खो दिया है।

एक साल से चल रहे थे बीमार

पर्रिकर ने 14 फरवरी 2018 को पेट में दर्द की शिकायत की थी। इसके बाद उन्हें मुंबई के लीलावती अस्पताल भेजा गया। शुरुआत में बताया गया था की वह ‘फूड प्वाइजनिंग’ से ग्रसित हैं। लेकिन बाद में पता चला कि वह अग्नाशय कैंसर से पीड़ित हैं। वह गोवा, मुंबई, दिल्ली और न्यूयॉर्क के अस्पतालों में इलाज करा चुके हैं। 31 जनवरी 2019 को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती कराया गया था। हाल ही में बीमार परिकर ने तीन मार्च को गोवा मेडिकल कॉलेज और अस्पताल (जीएमसीएच) में जांच कराई थी। फरवरी में परिकर का जीएमसीएच में एक ऑपरेशन भी हुआ था।

क्या है अग्नाशय कैंसर

अग्नाशय कैंसर यानी कि पैंक्रियाटिक कैंसर बहुत ही गंभीर रोग है। अग्नाशय में कैंसर युक्त कोशिकाओं के जन्म के कारण पैंक्रियाटिक कैंसर की शुरूआत होती है। यह अधिकतर 60 वर्ष से ऊपर की उम्र वाले लोगों में पाया जाता है। उम्र बढ़ने के साथ ही हमारे डीएनए में कैंसर पैदा करने वाले बदलाव होते हैं। इसी कारण 60 वर्ष या इससे ज्यादा उम्र के लोगों में पैंक्रियाटिक कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। इस कैंसर के होने की औसतन उम्र 72 साल है। महिलाओं के मुकाबले  पैंक्रियाटिक  कैंसर पुरुषों को ज्यादा होता है। जो पुरुषों धूम्रपान  करते है। उन्हें इस कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है। रेड मीट और चर्बी युक्त आहार का सेवन करने वालों को भी पैनक्रीएटिक कैंसर होने की आशंका बनी रहती है। 

शनिवार से ही आने लगी थी पर्रिकर के तबीयत नाजुक होने की खबरें

गोवा के मंत्री विजय सरदेसाई ने कल यानि बीते शनिवार को मुख्यमंत्री मनोहर पर्रिकर से मुलाकात की थी। मुलाकात के बाद उन्होंने कहा था कि पर्रिकर का स्वास्थ्य बिगड़ा है लेकिन स्थिर बना हुआ है। सरदेसाई गोवा के पांच विधायकों के साथ पर्रिकर के निजी आवास पर उनसे मिलने पहुंचे थे। पर्रिकर से मिलने पहुंचे सभी विधायक राज्य की भाजपा नीत सरकार के सहयोगी हैं। इनमें गोवा फॉरवार्ड पार्टी के जयेश सलगांवकर और विनोद पाल्येकर और निर्दलीय रोहन खौंते, गोविंद गावडे और प्रसाद गावंकर शामिल थे।

26 साल की उम्र में बने थे संघचालक

मनोहर पर्रिकर को 26 साल की उम्र में ही गोवा का संघचालक बनने का मौका मिल गया था। वे राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान उत्तरी गोवा में प्रमुख संगठनकर्ता रहे। साल 2000 में भाजपा की पहली सरकार में ही उन्हें CM बनने का मिल गया था।

Source :- www.livehindustan.com

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