महराजगंज जिले के करीब साढ़े चार लाख किसान खेती-बाड़ी करते हैं

महराजगंज जिले के करीब साढ़े चार लाख किसान खेती-बाड़ी करते हैं। मौजूदा समय में धान की फसल के लिए खेतों में धान की नर्सरी गिरायी जा रही है। अधिकांश किसानों ने बेहन गिरा भी दिया और उनका धान से से तीन इंच बड़ा भी हो गया है। मार्च से शुरू हुए कोरोना का संक्रमण अभी थमा नहीं कि देश में टिड्डी महामारी का प्रकोप भी शुरू हो गया है।
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प्रभारी जिला कृषि अधिकारी और कृषि रक्षा अधिकारी हिमांचल सोनकर ने बताया कि टिड्डियों का दल रेगिस्तान से चलकर पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश होते हुए उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर चुका है। वे हवा का रुख व भोजन देखकर वह अपना दिशा बदल रहे हैं। नमी व बारिश होने पर उनका प्रसार नहीं हो पाता। ऐसे में यदि बारिश हुई तो जिला टिड्डियों के प्रकोप से बच सकता है। कृषि विभाग के अधिकारियों कर्मचारियों को अलर्ट कर दिया गया है। किसानों के लिए भी सलाह जारी की गई है।
क्या हैं टिड्डी, कहां से आते हैं
महराजगंज के डीएम डॉ. उज्ज्वल कुमार ने एडवाइजरी जारी करते हुए बताया है कि टिड्डी एकिडाईडी परिवार का ऑथोप्टोरा गण का कीट है जो हेमिप्टेरा वंश का कीट टिड्डी या फसल टिड्डी कहलाता है। पूरे विश्व में इसकी छह जातियां पाई जाती हैं। इसका उड़ान दो हजार मिल तक है। मादा टिड्डी मिट्टी में कोष्ठ बनाकर रहती है। प्रत्येक कोष्ठ में 20 से 100 अंडे देती है। इनके बच्चे पांच से छह सप्ताह में वयस्क हो जाते हैं।
