शहर से अच्छा अपना गांव, यहीं करेंगे रोजगार

महराजगंज : जिले में अबतक 90,027 प्रवासी पहुंच चुके हैं। सोमवार को भी 3797 प्रवासी फरेंदा स्थित जांच केंद्र पर पहुंचे। प्रवासियों के पहुंचने से वीरान गांव गुलजार हो चुके हैं। जिन गांवों में सिर्फ बच्चे, बूढ़े और महिलाएं दिखती थीं, अब वहां के चौक चौराहों पर युवाओं की टोली दिख रही है। निर्धारित समय तक होम क्वारंटाइन रहने के बाद अब पांच हजार प्रवासी मनरेगा के तहत कार्य कर रहे हैं।
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दिल्ली-मुंबई के गली मोहल्लों में जो लोग मोमो व बर्गर बेचते थे वे अब अपने चौराहे पर दुकान लगा भविष्य के सपने बुनने में जुटे हैं। सरकार की पहल से अब कामगारों को आर्थिक मदद के साथ ही मनरेगा में रोजगार मिल रहा है। जिसकी वजह से प्रवासियों, श्रमिकों के समक्ष आर्थिक संकट से राहत मिल रही है। क्वारंटाइन के लिए रखे गए प्रवासियों को अनाज दिया जा रहा है। इसके बाद इन्हें भी रोजगार मिल जाएगा।
शहर से अच्छा अपना गांव, यहीं करेंगे रोजगार
लॉकडाउन के बाद दिल्ली से घर लौटे रामआसरे, पूना से आए पनियरा खास निवासी राजकुमार गुप्ता व ग्रामसभा बसडीला निवासी राकेश चौरसिया ने कहा कि शहर से अच्छा अपना गांव है। जो काम दूर शहर जा कर सकते थे अब अपने जिले में करेंगे। सरकार द्वारा स्वरोजगार के लिए विभिन्न योजनाएं चलाईं जा रही है। उसका लाभ हमें मिलेगा।
जिला प्रशासन का रोजगार पर जोर श्रमिकों को रोजगार दिलाने के लिए जिला प्रशासन की ओर से पहल की गई है। श्रमिकों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए 792 ग्राम पंचायतों में 2837 कार्य स्थलों पर फिजिकल डिस्टेंसिग के साथ काम कराया जा रहा है। 85133 श्रमिक मनरेगा के तहत कार्य कर रहे हैं। इन श्रमिकों में करीब पांच हजार बाहर से आए प्रवासी हैं। प्रशासन के मुताबिक 85 हजार लोगों को होम क्वारंटाइन कराया गया है।
