राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है तिरंगा, जानें राष्ट्रध्वज के बारे में वह सब कुछ जो आपको जानना चाहिए

26 जनवरी, यानि कि गणतंत्र दिवस। हमारा देश भारत इसी दिन गणतंत्र घोषित हुआ था। इस बार हम 70वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं।

26 जनवरी, यानि कि गणतंत्र दिवस। हमारा देश भारत इसी दिन गणतंत्र घोषित हुआ था। इस बार हम 70वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं। गांव, शहर, स्कूल, सरकारी व निजी संस्थान से लेकर देश-दुनिया में अपना राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शान से फहराया जाएगा। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज भारत के नागरिकों की आशाएं और आकांक्षाएं दर्शाता है। यह हमारे राष्ट्रीय गर्व का प्रतीक है। भारत की संविधान सभा ने राष्ट्रीय ध्वज का वर्तमान प्रारूप 22 जुलाई 1947 को अपनाया। करीब सात दशकों से सशस्त्र सेना बलों के जवानों, पुलिसकर्मियों, अधिकारियों और आम नागरिकों ने तिरंगे की पूरी शान को बनाए रखने के लिए निरंतर अपने जीवन न्यौछावर किया है। 

राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा अपने आप में अनूठा है, जोकि देश की समृद्धि दर्शाता है। तिरंगे के तीनों रंग और इसके ठीक बीच स्थित अशोक चक्र के अलग मायने हैं। इसके लिए भारतीय ध्वज संहिता निर्धारित है, जो यह बताता है कि तिरंगा फहराने से लेकर उत्सव मनाने तक हम किन चीजों का ख्याल रखें। 

आइए, सबसे पहले जानते हैं तिरंगे का संदेश 

भारत के राष्ट्रीय ध्वज की ऊपरी पट्टी में केसरिया रंग है जो देश की शक्ति और साहस को दर्शाता है। बीच में स्थित सफेद पट्टी धर्म चक्र के साथ शांति और सत्य का प्रतीक है। निचली हरी पट्टी उर्वरता, वृद्धि और भूमि की पवित्रता को दर्शाती है। तिरंगे के बीच वाली सफेद पट्टी में अशोक चक्र अंकित है। 

तिरंगे के बीच स्थित इसका व्यास सफेद पट्टी की चौड़ाई के लगभग बराबर है और इसमें 24 तीलियां हैं। इस धर्म चक्र को विधि का चक्र कहते हैं, जो तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व मौर्य सम्राट अशोक द्वारा बनाए गए सारनाथ स्तंभ से लिया गया है। इस चक्र को प्रदर्शित करने का आशय यह है कि जीवन गतिशील है और रुकने का अर्थ मृत्यु है।

तिरंगा को लेकर निर्धारित हैं नियम, क्या करें, क्या न करें

क्या करें:

  • राष्ट्रीय ध्वज को शैक्षिक संस्थानों (स्कूलों, कॉलेजों, संस्थानों, खेल परिसरों, स्काउट शिविरों आदि) में ध्वज को सम्मान देने की प्रेरणा देने के लिए फहराया जा सकता है। विद्यालयों में राष्ट्रीय ध्वज फहराने में निष्ठा की एक शपथ भी शामिल की गई है।
  • किसी सार्वजनिक, निजी संगठन या एक शैक्षिक संस्थान के सदस्य द्वारा राष्ट्रीय ध्वज को सभी दिनों और अवसरों, आयोजनों पर अन्यथा राष्ट्रीय ध्वज के मान सम्मान और प्रतिष्ठा के अनुरूप अवसरों पर फहराया जा सकता है।
  • नई संहिता की धारा 2 में सभी निजी नागरिकों अपने परिसरों में ध्वज फहराने का अधिकार देना स्वीकार किया गया है।

क्या न करें:

  • इस ध्वज को सांप्रदायिक लाभ, पर्दें या वस्त्रों के रूप में उपयोग नहीं किया जा सकता है। जहां तक संभव हो इसे मौसम से प्रभावित हुए बिना सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाना चाहिए।
  • इस ध्वज को आशय पूर्वक भूमि, फर्श या पानी से स्पर्श नहीं कराया जाना चाहिए। इसे वाहनों के हुड, ऊपर और बगल या पीछे, रेलों, नावों या वायुयान पर लपेटा नहीं जा सकता।
  • किसी अन्य ध्वज या ध्वज पट्ट को हमारे ध्वज से ऊंचे स्थान पर लगाया नहीं जा सकता है। तिरंगे ध्वज को वंदनवार, ध्वज पट्ट या गुलाब के समान संरचना बनाकर उपयोग नहीं किया जा सकता।

2002 में मिली अनुमति, कहीं भी कभी भी फहराएं तिरंगा, लेकिन…  

26 जनवरी 2002 को भारतीय ध्वज संहिता में संशोधन किया गया और स्वतंत्रता के कई वर्ष बाद भारत के नागरिकों को अपने घरों, कार्यालयों और फैक्टरी में न केवल राष्ट्रीय दिवसों पर, बल्कि किसी भी दिन बिना किसी रुकावट के फहराने की अनुमति मिल गई।  

अब भारतीय नागरिक राष्ट्रीय झंडे को शान से कहीं भी और किसी भी समय फहरा सकते है। बशर्ते कि वे ध्वज संहिता का कठोरता पूर्वक पालन करें और तिरंगे की शान में कोई कमी न आने दें।

तीन भागों में बांटी गई है राष्ट्रीय ध्वज संहिता 

सुविधा की दृष्टि से भारतीय ध्वज संहिता, 2002 को तीन भागों में बांटा गया है। संहिता के पहले भाग में राष्ट्रीय ध्वज का सामान्य विवरण है। दूसरे भाग में जनता, निजी संगठनों, शैक्षिक संस्थानों आदि के सदस्यों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन के विषय में बताया गया है, वहीं इसका तीसरा भाग केन्द्रीय और राज्य सरकारों तथा उनके संगठनों और अभिकरणों द्वारा राष्ट्रीय ध्वज के प्रदर्शन के विषय में जानकारी देता है।

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