महराजगंज। एनएच 730 हाइवे चौड़ीकरण में शनिवार को बुलडोजर ने शहर के मुख्य चौराहा का तस्वीर ही बदल दिया। नगर पुलिस चौकी ध्वस्त कर दी गई। पुरानी तहसील में गोरखपुर रोड पर पड़ने वाले कमरों को बुलडोजर ने ध्वस्त कर दिया। जिला परिषद की दुकान पूरी तरह हटा दिए जाने से शहर का सबसे पुरानी स्कूल प्राथमिक विद्यालय महराजगंज द्वितीय फ्रंट पर आ गया। सड़क चौड़ीकरण के लिए स्कूल का भी कुछ हिस्सा तोड़ा गया।
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डीएम अमरनाथ उपाध्याय के साथ बैठक के बाद एनएच के अधिकारी व निर्माण एजेंसी महाकाल के कर्मचारियों ने बिजली विभाग, टेलीफोन विभाग, नगर पालिका के साथ समन्वय बनाकर शनिवार सुबह दस बजे ही मुख्य चौराहे पर दो बुलडोजर लगा दिया। सबसे पहले बुलडोजर ने नगर पुलिस चौकी के सामने लगे सोलर स्ट्रीट लाइट को सावधानीपूर्वक खोद कर निकाला। उसके बाद पुलिस चौकी को ध्वस्त कर दिया। सड़क की दूसरी तरफ जिला परिषद की कुछ दुकानें रह गई थीं। बुलडोजर ने उसको भी ध्वस्त कर दिया। सड़क चौड़ीकरण में प्राथमिक विद्यालय महराजगंज द्वितीय में भी तोड़फोड़ किया गया। पहले इस विद्यालय को ढूंढने के बाद बड़ी मुश्किल से मिलता था, लेकिन अब यह मुख्य चौराहा के फ्रंट पर आ गया है।
प्राइमरी स्कूल में कर दी गई छुट्टी, पढ़ाई का वैकल्पिक होगा इंतजाम प्राथमिक विद्यालय महराजगंज द्वितीय का भवन अंग्रेजों ने वर्ष 1944 में बनवाया था। पहले इस विद्यालय में कक्षा आठ तक पढ़ाई हो रही थी। बाद में इसे गर्ल्स स्कूल बना दिया गया। अब इस विद्यालय में प्राइमरी कक्षा संचालित होती थी। शुक्रवार को बच्चे स्कूल में पढ़ने आए थे। विद्यालय में छोड़फोड़ देख प्रधानाध्यापिका साधना सिंह ने बीईओ ओपी तिवारी को सूचना दीं। फौरन वह विद्यालय पर पहुंचे। छुट्टी कर बच्चों को घर भेज दिया। तोड़फोड़ के बाद मुख्य चौराहे के फ्रंट पर स्कूल के आने से सामान व विद्यालय परिसर की सुरक्षा के लिए कार्रवाई के लिए बीईओ को पत्र दी। बीईओ ओपी तिवारी ने बताया कि इस मामले बीएसए से विमर्श कर बच्चों के पढ़ने का वैकल्पिक इंतजाम कराया जाएगा।
अतिक्रमण हटने के बाद विद्यालय को सुरक्षित करने के लिए सड़क की तरफ से शीघ्र ही बाउंड्रीवाल का निर्माण कराया जाएगा। ——– सुर्खी, चूना, कोयला व टेमा की मजबूती देख भौचक हुए लोग मुख्य चौराहा पर जब बुलडोजर पुरानी तहसील की दीवार व छत को तोड़ना शुरू किया तो अंग्रेजी हुकूमत के समय की इंजीनियरिंग की मजबूती देख लोग भौचक हो गए। पुराने तहसील का भवन 1862 में बना था। छत में एक भी सरिया का इस्तेमाल नहीं किया गया था। एक बुजुर्ग ने बताया कि पुराने जमाने में सुर्खी, चूना, कोयला व टेमा(लिक्विड गुड़) का मसाले में मिश्रण कर छत का निर्माण होता था। तहसील की छत बहुत मोटी थी। भवन पूरी तरह जर्जर था, लेकिन उसे तोड़ने में बुलडोजर का प्रेशर बढ़ाना पड़ रहा था।
Source :- https://www.livehindustan.com
