दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम कुम्भ मेले में कड़ाके की ठंड पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ रही है।
दुनिया के सबसे बड़े आध्यात्मिक और सांस्कृतिक समागम कुम्भ मेले में कड़ाके की ठंड पर श्रद्धालुओं की आस्था भारी पड़ रही है। गंगा, श्यामल यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम में तड़के से ही दूर दराज से पहुंचे कल्पवासी और श्रद्धालु आस्था की डुबकी लगाते हुए “ऊं नम: शिवाय, हर-हर महादवे, हर-हर गंगे” का उच्चारण करते हैं। हाड कंपाने वाली लगातार बढ़ती ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का कारवां सिर पर गठरी, कंधे पर कमरी और हाथ में लकड़ी पकड़े पग खरामा-खरामा संगम की ओर बढ़ते आ रहे हैं।
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पहाड़ों पर हो रही बर्फबारी और पछुआ हवा के कारण हाड़तोड़ ठंड भी बुजुर्ग श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं पा रही है। एक तरफ पहाड़ों पर बर्फबारी दूसरी तरफ पछुआ का का असर “सोने में सुहागा” की कहावत को चरितार्थ कर रही है। श्रद्धालुओं का त्रिवेणी की आस्था, दुधिया रोश्नी में नहाए भोर के पहर घाट के किनारे सीना चीरती शीत लहरें भी श्रद्धालुओं का गंगा की तरफ बढने वाले कदमों को रोक नहीं सक रहे। उनकी प्रचण्ड आस्था के सामने मानो शीश झुका कर त्याग, तपस्या, दान और भजन करने वाले कल्पवासियों एवं स्नानार्थियों का अभिवादन कर रही हैं। बुधवार की रात का पारा लुढ़क कर 5.5 डिग्री सेल्सियस और अधिकतम 22.3 डिग्री सेल्सियस रहा।
Sources :- livehindustan.com






