महराजगंज के जंगल में बिहार के बाघों को आने का न्योता मिलेगा

महराजगंज के जंगल में बिहार के बाघों को आने का न्योता मिलेगा। इसके लिए सोहगीबरवा सेंक्चुरी का जंगल बाघों के लिए खासतौर पर तैयार होने जा रहा है। खासकर बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के बाघों को रिझाने के लिए। तैयारियां शुरू भी हो गई हैं।
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सोहगीबरवा के 1990 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाले शिवपुर जंगल को खास इसके लिए चुना गया है। वाल्मीकिनगर और सोहगीबरवा कॉरिडोर में खास भूमिका निभाने वाले शिवपुर जंगल में नदी-नालों के किनारे कटीली झाड़ियां व बेंत के जंगल उगाए जाएंगे। बाघों के रहने लायक माहौल दिया जाएगा। जंगल को प्राकृतिक रूप से इस कदर संवारा जाएगा कि बाघ इस जंगल में खुद को सुरक्षित महसूस कर सकें। भरपूर खुराक पा सकें।
महराजगंज का सोहगीबरवा सेंक्चुरी और बिहार के वाल्मीकि टाइगर रिजर्व के जंगल आपस में सटे हैं। दोनों ओर के जानवरों का बेधड़क आना-जाना होता है। अक्सर वाल्मीकि रिजर्व से टाइगर व तेंदुए भी आते रहते हैं। वन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, सोहगीबरवा सेंक्चुरी में इस समय सात बाघ हैं, जिनमें से तीन नर व चार मादा वयस्क बाघ हैं। वहीं वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या अधिक है। वहां वर्ष 2014 में 44 बाघ थे। अब इनकी संख्या 60 के ऊपर हो गई है। अपनी मूवमेंट व रहन-सहन की आदत के अनुसार वीटीआर में 65 से 70 बाघ ही रह सकते हैं। अब उन बाघों को रिझाकर सोहगीबरवा के जंगल को आबाद करने की कोशिशें शुरू हुई हैं।







